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उल्टे हनुमान मंदिर "कवन सो काज कठिन जगमाहीं, जो नहिं होइ, तात तुम पाहीं।" सांवेर के पूर्व दिशा में खान नदी के पास में जंहा पर " विश्व के एक मात्र उल्टे हनुमान जी का मंदिर " है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब अहिरावण भगवान श्रीराम व लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया, तब हनुमान ने पाताल लोक जाकर अहिरावण का वध कर श्रीराम और लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की थी। ऐसी मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहाँ से हनुमानजी ने पाताल लोक जाने हेतु पृथ्वी में प्रवेश किया था। कहते हैं भक्ति में तर्क के बजाय आस्था का महत्व अधिक होता है। यहाँ प्रतिष्ठित मूर्ति अत्यंत चमत्कारी मानी जाती है। यहाँ कई संतों की समाधियाँ हैं। सन् 1200 तक का इतिहास यहाँ मिलता है। उल्टे हनुमान मंदिर परिसर में पीपल, नीम, पारिजात, तुलसी, बरगद के पेड़ हैं। यहाँ वर्षों पुराने दो पारिजात के वृक्ष हैं। पुराणों के अनुसार पारिजात वृक्ष में हनुमानजी का भी वास रहता है। मंदिर के आसपास के वृक्षों पर तोतों के कई झुंड हैं। इस बारे में एक दंतकथा भी प्रचलित है। तोता ब्राह्मण का अवतार माना जाता है। हनुमानजी ने भी तु...
माँ चामुंडा मंदिर सांवेर नगर की आस्था का प्रमुख केंद्र माँ चामुंडा का मंदिर, नगर के दक्षिण में इंदौर रोड पर स्थित है। सन 1232 में होल्कर वंशो द्वारा इस मंदिर की स्थापना महाराजा मल्हार राव जी ने की एवं वे यहाँ पूजा-अर्चना के लिए आया करते थे। मंदिर के बारे में किंवदंती है की महाराजा मल्हार राव होल्कर को देवी ने स्वप्न में आकर इस स्थल की खुदाई करने को कहा था, भूमि पूजन के पश्चात महाराज द्वारा स्थल की खुदाई करने पर माताजी की यह विशाल प्रतिमा यंहा प्रकट हुई। मंदिर में माँ चामुंडा की विशाल प्रतिमा पूर्वाभिमुख होकर अपने तेजस्वी स्वरुप में विद्यमान है, पास ही में श्री भैरवनाथ एवं समीप में समाधी वाले बाबा की समाधी है। माँ चामुंडा की यह प्रतिमा अष्ट भुजाओ की होकर इसकी छह भुजाओ में शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, तलवार, ढाल और राक्षस की चोटी है। प्रतिमा के एक हाथ से त्रिशूल द्वारा राक्षस का वध परिलक्षित है । माताजी के मस्तक पर मुकुट के मध्य शिवलिंग है। मान्यता है की माता की यह प्रतिमा प्रातः काल बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था एवं संध्या के समय मातृ अवस्था में परिलक्षित होती है। यहाँ न...
नगर पंचायत सांवेर नगर पालिका सांवेर कि स्थापना 12 दिसंबर 1952 को हुई थी। स्थापना वर्ष में नगर में कुल 5 वार्ड एवं लगभग 1200 मतदाता थे। प्रारम्भिक वर्षो में नगर पालिका कार्यालय स्थानीय बस स्टैंड पर स्थित था । नवीन नगर पंचायत कार्यालय वर्ष 1975 में निर्मित हुआ था । नगर पालिका सांवेर के प्रथम अध्यक्ष श्री केशवराव जी कानूनगो थे। वर्ष 1994 में नगर पालिका को नगर पंचायत सांवेर में परिवर्तित किया गया था । नगर पंचायत सांवेर का कुल क्षेत्रफल 8 कि. मी. है। सांवेर नगर की कुल जनसँख्या वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार 13126 है, एवं कुल मतदाता 8675 हे, इसमें पुरुष मतदाता 4453 एवं 4222 महिला मतदाता है। नगर में प्रथम विद्युत् कनेक्शन वर्ष 1965 में हुए थे एवं जल प्रदाय हेतु नल कनेक्शन नगर में 1972 में दिए गए थे। नगर का सबसे पुराना शासकीय कार्यालय डाकघर है, जिसकी स्थापना 1883 में हुई थी। नगर में 1 स्नातक महाविद्यालय, 2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, 7 माध्यमिक विद्यालय, 7 प्राथमिक विद्यालय एवं 1 उर्दू विद्यालय है।
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सांवेर का इतिहास इतिहास के झरोखे में नजर डाले, तो सांवेर का उल्लेख मिलता है, सांवेर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सदियों पुरानी है। इसका उल्लेख यहाँ के मकान व शिलालेखो पर देखने को मिलता है। सांवेर का प्राचीन नाम " सगाना " हुआ करता था, जो कि श्री बाजीराव पेशवा के समय से सांवेर में परिवर्तित हो गया था । उपलब्ध जानकारी के अनुसार शंहशाह हुमायूँ के दिल्ली दरबार में जागीरदार माननीय श्री ठाकुर सिदासजी कानूनगो द्वारा हिजरी सन 966 वि.स. 1602 याने करीब 450 वर्ष पूर्व सांवेर की स्थापना की गयी। सांवेर में कुछ मकानों कि नक्काशी व शिल्पकार्य से भी अनुमान लगता है कि सांवेर पुरातनकाल में भी अस्तित्व में था। नगर के लगभग सभी मंदिरों मसलन राम मंदिर, कृष्ण मंदिर, शंकर मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, नील कंठेश्वर मंदिर, गणेश मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, अनंतनारायण मंदिर आदि की स्थापना देवी अहिल्या बाई होल्कर के शासन काल में हुई थी। नगर के उज्जैन स्थित खेडापति हनुमान मंदिर (बड़े हनुमान मंदिर) की स्थापना श्री शिवाजी महाराज के दूत स्वामी समर्थ रामदासजी द्वारा की गयी थी। तात्कालिक समय में होलकर राजघराने की सीमा बड़े...

Sanwer Nagar

भौगोलिक सांवेर तहसील की भौगोलिक स्थिती विश्व के मानचित्र पर (22.98 डिग्री) अक्षांश, 22 ° 58 '48 "भूमध्य रेखा और देशांतर (75.83 डिग्री) के उत्तर 75 ° 49' 47" प्राइम मेरिडियन के पूर्व में तथा समुद्र तल से न्यूनतम २३९.२९ मीटर पर स्थित है| सांवेर इंदौर संसदीय क्षेत्र में आता है| शासकीय मानचित्र बताते है की नैसर्गिक रूप से भी उन्नत है| गेंहू, कपास, चना, मक्का, सोयाबीन आदि यहाँ की मुख्या फसले है| ऐतिहासिक सांवेर मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक नगर था जिस की झलकिया आज भी मिलती है | मालवा के मध्य में उत्तर छोर खान (ख्याता) नदी तट पर बसा सांवेर नगर में इतिहास लबालब भरा पड़ा है | सांवेर के पश्चिम में चन्द्रावती गंज के आगे ग्वालियर, पूर्व में पवार स्टेट और दक्षिण में होल्कर स्टेट की सीमाए लगती थी| आज भी सांवेर में ऐसे मकान, मंदिर और अन्य विरासत के प्रमाण मौजूद है | इस सांवेर का अतीत कितना सम्रद्धिशाली रहा होगा, इसका अंदाज सांवेर के कुछ पुराने माकन देखकर किया जा सकता है | आज भी इतिहास के बहुत अवशेष यहाँ मिलते है| सांवेर की वैभवता व् ऐश्वर्य की जीवनगाथा सुनाने वाले कई अवशे...