माँ चामुंडा मंदिर
सांवेर नगर की आस्था का प्रमुख केंद्र माँ चामुंडा का मंदिर, नगर के दक्षिण में इंदौर रोड पर स्थित है। सन 1232 में होल्कर वंशो द्वारा इस मंदिर की स्थापना महाराजा मल्हार राव जी ने की एवं वे यहाँ पूजा-अर्चना के लिए आया करते थे। मंदिर के बारे में किंवदंती है की महाराजा मल्हार राव होल्कर को देवी ने स्वप्न में आकर इस स्थल की खुदाई करने को कहा था, भूमि पूजन के पश्चात महाराज द्वारा स्थल की खुदाई करने पर माताजी की यह विशाल प्रतिमा यंहा प्रकट हुई। मंदिर में माँ चामुंडा की विशाल प्रतिमा पूर्वाभिमुख होकर अपने तेजस्वी स्वरुप में विद्यमान है, पास ही में श्री भैरवनाथ एवं समीप में समाधी वाले बाबा की समाधी है। माँ चामुंडा की यह प्रतिमा अष्ट भुजाओ की होकर इसकी छह भुजाओ में शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, तलवार, ढाल और राक्षस की चोटी है। प्रतिमा के एक हाथ से त्रिशूल द्वारा राक्षस का वध परिलक्षित है । माताजी के मस्तक पर मुकुट के मध्य शिवलिंग है। मान्यता है की माता की यह प्रतिमा प्रातः काल बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था एवं संध्या के समय मातृ अवस्था में परिलक्षित होती है। यहाँ नवरात्री में यज्ञ, अनुष्ठान होता है। शतचंडी, नवचंडी के कई कुंडात्मक यज्ञ हो चुके है । अभी तक माता के दरबार में कई भंडारे हो चुके है एवं लखबीर सिंह लक्खा, कैलाश विजयवर्गीय, बाबु राजौरिया आदि के भजन संध्याए हो चुकी है।

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