श्री आदिनाथ श्वेताम्बर जैन मंदिर

जैन श्वेताम्बर आदिनाथ जैन मंदिर अति प्राचीन है भगवान आदिनाथ की प्रतिमा चमत्कारी तथा मनमोहक है मंदिर में प्रवेश करते ही मन को शांति और सुकून मिलता है , कहते है की मंदिर की स्थापना साढ़े चार सौ साल पूर्व सन 1560-61 में गुजरात से आये सेठ गणपत जी ने की थी , उस समय दो फूट चौड़ी तथा 40 फूट लम्बी गार्डर लाकर मंदिर में लगायी थी जो आज भी वैसी ही लगी है । इंदौर के होल्कर महाराज ने सेठ को नगर सेठ की उपाधि दी । जैन मंदिर में आज तक नगर सेठ कटारिया परिवार की और से पवित्र पयुर्षण पर्व पर भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन पर पूजा प्रभावना का लाभ लिया जाता है । बाद में नगर सेठ परिवार ने उक्त मंदिर सांवेर के जैन समाज के सुपुर्द कर दिया । इसका संचालन अब जैन श्री संघ सांवेर करता है यंहा पर अनेक साधू-साध्वियो ने चातुर्मास किया तथा राष्ट्र संत आचार्य, साधू-साध्वी बिहार के दौरान आये तथा आदिनाथ भगवान की मनमोहक मूर्ति के दर्शन कर प्रभावित हुवे । मंदिर के गर्भगृह में जैन समाज के प्रथम तीर्थंकर श्री आदिश्वर भगवान् की ध्यानमग्न संगमरमर की प्रतिमा भव्य स्वरुप में विद्यमान है । प्रतिमा के बाई और श्री अभिनन्दन स्वामीजी एवं दाई और श्री पार्श्वनाथ भगवान् श्री सुपार्श्वनाथ भगवन की प्रतिमाये मौजूद है । मंदिर में चक्रेश्वरी देवी, गोमुखी यक्षराज, पदमावती देवी, मणिभद्र एवं नाकोडाजी भैरवनाथ आदि की दिव्य मुर्तिया स्थापित है। मंदिर में ही श्री घंटाकर्ण महावीर, श्री सम्मेद शिखर तीर्थ, श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ एवं श्री शत्रुंजय महातीर्थ के कांच के बने पट मन को मोह लेते है।

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